Ab Aansuo Ko Aankho Me Sajana Hoga

अब आंसुओ को आँखों मैं सजाना होगा,
चिराग बुझ गये खुद को जलाना होगा!

ना समझना के तुमसे बिछड़ के खुश हैं,
हमे लोगों की खातिर मुस्कुराना होगा!

फिर शाम ढाल गई तुम आए ना आज भी,
दिल को आज फिर उम्मीदों से बहलाना होगा!

वादा खिलाफी कर के मुस्कुराते हो आप,
देखना एक दिन सनम आपको पछताना होगा!

लहू से अपने कफ़न पे तेरा नाम लिख जाऊंगा,
थाम के हाथ मैं फूल तुमको आना होगा!

अभी से ना कीजिए तकाज़ा-ए-मसरूफ़ियत का बहाना,
अभी उठना है जनाज़ा कन्धा तो देना होगा!

मुद्दतो किया है इंतज़ार आपका हमने,
उम्र कट चुकी है अब तो हमे जाना होगा!

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