Hansi Dekh Ke Meri Sab Mehfil Main Muskura Diye

हँसी देख के मेरी सब महफ़िल मैं मुस्कुरा दिए,
तुमने पढ़ लिए शायद गम जो मेरे पास आ गये,

बाहों मैं भर के पूछा जब तुमने,
कुछ ना बोले हम बस मुस्कुरा दिए,

जाना था आज तुम्हे हमसे दूर हमेशा के लिए,
जाते जाते तेरे चेहरे से अश्क़ चुरा लिए,

सज के बैठी थी तू अपने महबूब के आगोश मैं,
सारे अरमान अपने इश्क़ की आग मैं जला दिए,

कुछ ना सोचा कभी मैने कुछ ना चाहा था तेरे सिवा,
कह ना पाया दिल की बात शायद थी ये मेरी ख़ता,

काश मैं इक़रार कर देता अपनी मोहब्बत का,
तो अंजाम-ए-इश्क़ मैं ना मिलती ये सज़ा,

जाना है कल सुबह तुम्हे सब नातो को तोड़ कर,
इस बात ने मेरे अश्क़ थे बहा दिए,

देखी थी मैने शिकन तेरे चेहरे पर भी,
मेरे आसुओं ने सितम तुझपे ढा दिए,

तूने पूछा जब हाल दिल दे के अपनी कसम,
राज़ सारे इस दिल के थे तुझे बता दिए,

पलकें भीगी हुई लब खामोश थे,
तेरी खामोशी ने मुझे सारे जवाब दिए,

सज चुकी थी पर डोली तेरी,
हम दोनो ने अपने गम छुपा लिए,

सब रोए थे तेरी विदाई मैं,
लेकिन देखा जब तूने मुझे तो हम मुस्कुरा दिए!!

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