Hum Dekhte Reh Gaye Hath Se Jana Dil Ka

उन के अंदाज़-ए-करम उन पे वो आना दिल का,
हाए वो वक़्त, वो बातें, वो ज़माना दिल का,

ना सुना उसने तवज्जो से फसाना दिल का,
उमर गुज़री पर दर्द ना जाना दिल का,

दिल्लगी, दिल की लगी बन के मिटा देती है,
रोग दुश्मन को भी ऐ रब ना लगाना दिल का,

वो भी अपने ना हुए दिल भी गया हाथों से,
ऐसे आने से तो बेहतर है ना आना दिल का,

उन की महफ़िल में उन की तब्बसुम की क़सम,
हम देखते रह गये हाथ से जाना दिल का!!

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