Jab Bhi Hogi Pahli Barish, Tumko Samne Payenge

जब भी होगी पहली बारिश,
तुमको सामने पाएँगे,
वो बूँदों से भरा चेहरा,
तुम्हारा हम कैसे देख पाएँगे,
बहेगी जब भी सर्द हवाएं,
हम खुद को तन्हा पाएँगे,
एहसास तुम्हारे साथ का,
हम कैसे महसूस कर पाएँगे,
इस डूबती हुई ज़िंदगी में,
हम बिल्कुल ही रुक जाएँगे,
थाम लो हमें गिरने से पहले,
हम कैसे यूँ जी पाएँगे,
ले डूबेगा यह दर्द हमें,
और हम जीते जी मार जाएँगे!!

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