Most Popular Sher O Shayari on Life by Ghalib

Shayari on Life by Ghalib – Mirza Asadullah Beg Khan AKA Mirza Ghalib was born on 27 December 1797 in Agra. When he was five years old, his father died in the battle of Alwar in 1807. He spent most of his evenings either drinking or at Mushairas.  He is not only popular in India and Pakistan but also among the Hindustani diaspora around the world.

Here, we have tried to give a tribute to Mirza Ghalib, by presenting his famous shayari on Life which prove that Ghalib’s charm will never fade.

Shayari on Life by Ghalib

अपनी गली में मुझको ना कर दफ़्न बाद-ए-क़त्ल,
मेरे पते से ख़ल्क़ को क्यों तेरा घर मिले!!

आईना देख अपना सा मुँह ले के रह गये,
साहब को दिल ना देने पे कितना गुरुर था!!

ऐ है बे-कशी-ए-इश्क़ पे रोना ‘ग़ालिब’,
किस के घर जाएगा सैलाब-ए-बला मेरे बाद!!

आगे आती थी हाल-ए-दिल पे हँसी,
अब किसी बात पर नही आती!!

Best Shayari on Life by Ghalib

आता है दाग-ए-हसरत-ए-दिल का शुमार याद,
मुझ से मेरे गुनाह का हिसाब ऐ खुदा ना माँग!!

आशिक़ हूँ पे माशूक़-फरेबी है मेरा काम,
मजनू को बुरा कहती है लैला मेरे आगे!!

इश्क़ ने ‘ग़ालिब’ निक्क्मा कर दिया,
वरना हम भी आदमी थे काम के!!

इश्क़ पर ज़ोर नही है ये वो आतश ‘ग़ालिब’,
की लगाए ना लगे और बुझाए ना बने!!

इस नज़ाक़त का बुरा हो वो भले हैं तो क्या,
हाथ आवे तो उन्हे हाथ लगाए ना बने!!

Famous Shayari on Life by Ghalib

इस सादगी पे कौन ना मार जाए ऐ खुदा,
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नही!!

ग़ालिब वो दिन गये अब ये हमाक़त कौन करता है,
वो क्या कहते हैं उसको?
हाँ,
मोहबत कौन करता है!!

तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी का ये आलम है के,
सुबह के गम शाम को पुराने हो जाते है!!

Other Shayari by Mirza Ghalib

तेरे हुस्न को पर्दे की ज़रूरत ही क्या है,
ग़ालिब
कौन होश में रहता है तुझे देखने बाद!!

कहते तो हो यूँ कहते, यूँ कहते जो यार आता,
सब कहने की बात है कुछ भी नहीं कहा जाता।

आशिकी सब्र तलब और तमन्ना बेताब,
दिल का क्या रंग करूँ खून-ए-जिगर होने तक।

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